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किसे दी प्रीत नू तू श्यामा नइयो जाणदा भुल जावे वल तेनू बंसरी वजाण दा
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किसे दी प्रीत नू तू श्यामा नइयो जाणदा भुल जावे वल तेनू बंसरी वजाण दा बंसरी तेरी नू श्यामा ले जाण चोर वे दिन रात गलियां च मचांदा फिरे शोर वे साडे दिलां वाला प्यार श्यामा तू नइयो जाणदा भुल जावे ———- किसे दी प्रीत नू ——— थोडा ज्या मक्खन ते थोडी ज्यी मिश्री कल वाली गल श्यामा हजे वी न विसरी पे गया स्वाद तेनू मक्खना दे खान दा भुल जावे ——- किसे दी प्रीत नू ——- करदा शरारतां गोपियां नू घेर के घर आवें मगरों बुलाण आण ढेर वे पे गया स्वाद तेनू रास रचान दा भुल जावे ——— किसे दी प्रीत नू ———-
