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बिन पानी के नाव खे रहा है, वो नसीबों से ज़्यादा दे रहा है
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जय जय श्री राधे कृष्णा बिन पानी के नाव खे रहा है, वो नसीबों से ज़्यादा दे रहा है..... भूखे उठते है पर भूखे सोते नहीं, दुःख आते है हम पर तो रोते नहीं, दिन रात खबर ले रहा है, वो नसीबों से ज़्यादा दे रहा है..... मेरा छोटा सा घर महलो का राजा है वो, मेरी औक़ात क्या महाराजा है वो, फिर भी साथ मेरे रह रहा है, वो नसीबों से ज़्यादा दे रहा है..... बनवारी दीवाने बड़े से बड़े, इनके चरणों में कंकर के जैसे पड़े, फिर भी मेरी अर्ज सुन रहा है, वो नसीबों से ज़्यादा दे रहा है..... ज्यादा कहते मगर कह नहीं पा रहे आंसू बहते मगर बह नहीं पा रहे दिल मेरा यही कह रहा है वो नसीबों से ज्यादा दे रहा है .......
