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मेरी आस यही अरदास यही तुम्हें अपनी कहानी सुनाया करुं
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मेरी आस यही अरदास यही तुम्हें अपनी कहानी सुनाया करुं मेरी इसमें खुशी तुम रुठे रहो मैं अकेले में तुमको मनाया करुं कोई योगी कहे या दीवाना कहे चाहे पागल सारा जमाना कहे मेरे रोने से गर तुझको आए हंसी तो मैं रो रो के तुमको हंसाया करुं मेरी आस यहीअरदास यही तुम्हें अपनी कहानी सुनाया करुं मैं भूलूं कभी न तेरे नाम को करुं सुबह शाम तेरे ध्यान को तेरे चरणों की धूलि को चंदन समझ रोज माथे पे अपने लगाया करुं मेरी आस यही अरदास यही तुम्हें अपनी कहानी सुनाया करुं
